क्या चल रहा है?

सुनील छेत्री को याद आया करियर का वो दौर, जब कोच ने कहा- तुम लायक नहीं, बी टीम में चले जाओ

[ad_1]

सुनील छेत्री भारतीय टीम के कप्तान हैं

सुनील छेत्री भारतीय टीम के कप्तान हैं

सुनील छेत्री (Sunil Chhetri) 2012 में 26 साल की उम्र स्पोर्टिंग लिस्बन (Sporting Lisbon) की टीम से जुड़े थे लेकिन करार खत्म होने से पहले ही भारत लौट आए थे

नई दिल्ली. भारतीय कप्तान सुनील छेत्री (Sunil Chhetri) देश के सबसे बड़े फुटबॉल स्टार हैं. आईएसएल (ISL) हो या राष्ट्रीय टीम उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छेत्री को अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. छेत्री ने बताया कि कैसे एक अंतरराष्ट्रीय क्लब ने उनके खेल को दूसरे दर्जे का बताया था जिससे वह काफी आहत हुए थे. भारतीय फुटबॉल टीम के करिश्माई कप्तान सुनील छेत्री जब 2012 में स्पोर्टिंग लिस्बन की टीम से जुड़े थे तो उन्हें उसके मुख्य कोच ने कहा था कि, ‘तुम शीर्ष टीम में जगह बनाने लायक नहीं हो, बी टीम में चले जाओ.’

छेत्री को बी टीम में भेजा गया था
छेत्री (Sunil Chhetri) तब 26 साल के थे और उन्हें पुर्तगाल के इस क्लब ने तीन साल के लिये अनुबंधित किया था लेकिन वह नौ महीने बाद ही स्वदेश लौट गये थे. छेत्री ने इंडियनसुपरलीग.काम से कहा, ‘एक सप्ताह के बाद मुख्य कोच ने मुझसे कहा, ‘तुम बहुत अच्छे खिलाड़ी नहीं हो, बी टीम में चले जाओ.’ वह सही था. मैं भारतीय लीग में खेल रहा था और उनकी तुलना में स्पोर्टिंग लिस्बन की ‘ए’ टीम की गति बहुत तेज थी.’

उन्होंने कहा, ‘मैं नौ महीने वहां रहा और इस बीच मुझे पांच मैच खेलने को मिले जिनमें मैं एक भी गोल नहीं कर पाया. करार में हटाये जाने पर 40 या 50 लाख का प्रावधान था. मैं तीन साल तक वहां रह सकता था लेकिन मैंने कोच से कहा कि मैं भारत लौटना चाहता हूं और किसी को इस राशि का भुगतान करने की जरूरत नहीं. उनका रवैया वास्तव में बहुत अच्छा था.’अमेरिका के कन्सास सिटी से भी जुड़े थे छेत्री
छेत्री का पहला विदेशी अनुबंध हालांकि अमेरिका के कन्सास सिटी विजार्ड्स से था जिससे वह 2010 में जुड़े थे. मेजर लीग सॉकर में भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी और वह एक साल के अंदर स्वदेश लौट आये. उन्हें उसकी शीर्ष टीम से केवल एक मैच खेलने को मिला. उन्होंने एमएलएस में कोई मैच नहीं खेला.

छेत्री ने कहा, ‘मैंने छह सात मैत्री मैच खेले, दो हैट्रिक बनायी और एक बार दो गोल किये और मुझे लगा कि मैं शुरुआत करने जा रहा हूं. लेकिन हम 4-2-3-1 के प्रारूप में खेलते थे और केवल एक स्ट्राइकर केई कमारा खेलता था. वह अफ्रीकी था और मुझ पर उसे हमेशा प्राथमिकता दी जाती थी. इसलिए मुझे पहले चार – पांच मैचों में मौका नहीं मिला. मैं बहुत दुखी थी. मुझे बाहर बैठने की आदत नहीं थी. मैं परेशान रहने लगा था.’ जब छेत्री (Sunil Chhetri) अमेरिका में थे तब भारत के तत्कालीन मुख्य कोच बॉब हॉटन ने उनसे दोहा में 2011 में खेले गये एशियाई कप के लिये राष्ट्रीय टीम से जुड़ने के लिये कहा. वह भारत लौट गये और फिर कन्सास नहीं गये.

फैंस के कारण कई बार रोये हैं सुनील छेत्री, खेल छोड़ने तक का बना लिया था मन






[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Covid – 19

Live COVID-19 statistics for
India
Confirmed
31,293,062
Recovered
30,468,079
Deaths
419,470
Last updated: 7 minutes ago

Live Tv

Advertisement

rashifal