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राजनीतिक सोच और राष्ट्रवाद की नींव पर खड़ी है ‘एल-क्लासिको’ की प्रतिद्वंदिता

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लियोनेस मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी हैं

लियोनेस मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी हैं

बार्सिलोना (Barcelona) और रियाल मैड्रिड (Real Madrid) के बीच के मुकाबलों को एल-क्लासिको कहा जाता है जो 1902 में पहली बार खेला गया

नई दिल्ली. एल क्लासिको, दो ऐसे शब्द जो किसी भी फुटबॉल प्रेमी के दिल को धड़काने के लिए बहुत हैं. दुनिया का सबसे हाईवोल्टेज फुटबॉल मुकाबला जिसे देखने के लिए फुटबॉल प्रेमी बावरे हुए रहते हैं. इस मुकाबले में आमने-सामने होते हैं स्पेन के दो सबसे बड़े क्लब जो आज दुनिया के सबसे अमीर क्लब माने जाते हैं. बार्सिलोना औऱ रियाल मैड्रिड (Real Madrid) जब मैदान में आमने-सामने होती है दुनिया की निगाहें बस इसी मुकाबले पर लगी होती है. एल क्लासिको (EL Classico) नाम से जाने जाने वाले इस मुकाबले में सिर्फ खेल के कारण ही प्रतिद्वंदिता नहीं है इसकी नींव राजनीतिक सोच और देशभक्ति जैसी भावनाएं हैं.

क्या है इस प्रतिद्वंदिता का इतिहास
फुटबॉल क्लब डी बार्सिलोना या एफसीबी की स्थापना 1899 में कातालुन्य की राजधानी बार्सिलोना में हुआ. यह वह शहर थो जो अपने आप को स्पेन से अगल मानता था. वहीं 1902 में मैड्रिड क्लब बनाया गया. मैड्रिड स्पानी राष्ट्रवादियों के दिलों में बसता है. साल 1902 में स्पेन के राजा ने एक टूर्नामेंट का आय़ोजन कराया जिसमें दोनों क्लब ने हिस्सा लिया. फाइनल में बास्क और कातालन टीम, दो स्पानी राष्ट्रवाद से लड़ रही टीमों के जाने से टूर्नामेंट आयोजित करवाने वालों ने तीसरे स्थान के लिए एक मैच और करवा दिया. और वो मैच बना पहला एल क्लासिको.

1930 तक बार्सिलोना क्लब कातालन राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया गया. इसी कारण 1936 में फ्रांसिस्को फ्रांको ने आज़ादी चाहने वाले कातालुन्या के क्लब बार्सिलोना के अध्यक्ष जोसेप सुन्योल को बिना किसी मुकदमे के गिरफ्तार कर मरवा डाला तबसे दोनों के बीच मैच का मायने सिर्फ खेल तक ही सीमित नहीं रह गए. यूं तो कहा जाता है कि खेल और राजनीति को हमेशा अलग ही रखना चाहिए लेकिन इस मैच में ये अकसर राजनीतिक रंग दिखते ही हैं.. मैच चाहें मैड्रिड के हॉम ग्राउंड एस्तादियो सांतियागो ब्रनबू में हो या अपने घर कैंप नू में, बार्सिलोना के सपोर्टर कातालन आज़ादी के झंड़े दिखाते हैं और फुटबॉल संघ वाले ज़ुर्माना लगाते रहते हैं.21 शताब्दी की शुरुआत ने दोनों क्लब के बीच मैच को एल क्लासिको कहा जाना लगा. एल क्लासिको का मतलब होता है ‘द क्लासिक’ यानि सबसे शानदार. बार्सिलोना और रियल मैड्रिड के बीच यह मुकाबला स्पेन में सिर्फ एक डर्बी मैच नहीं है बल्कि उसे कहीं बढ़कर हैं.

जानिए किस पर कौन पड़ता है भारी
खिताबों की बात करें तो दोनों के बीच हमेशा ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला है. दोनों के बीच एक मार्च 2020 तक 277 मैच खेले गए हैं जिसमें से मैड्रिड ने 100 मैच जीते हैं वहीं बार्सिलोना ने 115 मैच जीते. 62 मुकाबले ड्रॉ रहे. वहीं अगर लीग की बात करें तो मैड्रिड ने 33 ला लिगा खिताब जीते हैं वहीं बार्सिलोना ने 26 बार यह खिताब जीता है. कोपा डेल रे की बात करें तो मैड्रिड ने 19 तो बार्सिलोना ने 30 बार ययह खिचाब जीता है. UEFA कप बार्सिलोना ने चार बार जीता है वहीं मैड्रिड अब तक एक बार भी जीत नहीं पाई है वहीं मैड्रिड ने जो यूरोपा लीग जीती है लेकिन बार्सिलोना अब तक यह नहीं कर पाई है. कुल मिलाकर बात करें तो मैड्रिड ने 85 और बार्सिलोना ने 95 खिताब जीते हैं.1943 में विश्व युद्ध -2 के दौरान दोनों टीमों में कोपा डेल रे का मैच अब तक का सबसे एकतरफा मैच रहा है. इस मैच में रियाल ने बार्सिलोना को 11-1 से हरा दिया था.

रोनाल्डो और लियोनेल मेसी ने बढ़ाया एल क्लासिको का रोमांच
इन दोनों क्लब के बीच की प्रतिद्वंदिता को और बढ़ाया क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) और लियोनेल मेसी (Lionel Messi) ने. फुटबॉल जगत के यह दो खिलाड़ी 11 साल तक एल क्लासिको में एक दूसरे का सामना करते रहे. फुटबॉल जगत पहले से ही मेसी और रोनाल्डो के बीच बंटा हुआ था और एल क्लासिको ने फैंस के लिए प्रतिद्वंदिता को औऱ रोमांचक बना दिया. दोनों ने इस दौरान विश्व फुटबॉल में अपना नाम कमाया और कभी न मिटनी वाली पहचान बनाई. रोनाल्डो के मैड्रिड को छोड़ने से पहले यह एल क्लासिको की बड़ी पहचान था. वहीं मेसी अपने करियर की शुरुआत से लेकर अब तक बार्सिलोना से ही जुड़े हैं और इस क्लब का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं.






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