क्या चल रहा है?

मेजबानी के लिए बीसीसीआई को चुकाना होगा 906 करोड़ रुपये टैक्स, आईसीसी ने डाला ये प्रेशर

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भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2021 की मेजबानी करनी है.

भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2021 की मेजबानी करनी है.

बीसीसीआई (BCCI) की टैक्स छूट की अपील केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) के पास लंबित है और सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है.

नई दिल्ली. टी20 वर्ल्ड कप 2021 (T20 World Cup 2021) का आयोजन इसी साल अक्टूबर के महीने में भारत में होना है. अगर केंद्र सरकार टैक्स रिबेट नहीं देती है तो वर्ल्ड कप के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) को 906 करोड़ रुपये टैक्स चुकाना पड़ सकता है. अगर सरकार कुछ राहत देती है तो भी बीसीसीआई को 227 करोड़ रुपये देना होगा. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने बीसीसीआई से कहा है कि वह भारत सरकार से टैक्स में छूट की मांग करे. टैक्स का मुद्दा नहीं सुलझने पर आईसीसी ने वर्ल्ड कप का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में करा सकता है जो उसने बैकअप के तौर पर रखा है. बीसीसीआई पहले ही आईसीसी की दो डेडलाइन 31 दिसबंर और 31 दिसंबर 2020 मिस कर चुकी है. बीसीसीआई पर यह फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है कि वह मेजबानी करना चाहता है या नहीं. रिपोर्ट के अनुसार बीसीसीआई के पास फरवरी तक का समय है.

बीसीसीआई की टैक्स छूट की अपील केंद्रीय वित्त मंत्रालय के पास लंबित है और सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है. दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड भारतीय खेल मंत्रालय के अंतर्गत नहीं आता है और उसे राष्ट्रीय खेल महासंघ के तौर पर मान्यता प्राप्त भी नहीं है. आईसीसी ने दो डेडलाइन खत्म होने के बाद बीसीसीआई के सामने दो विकल्प रखे हैं. पहला टी20 वर्ल्ड कप का आयोजन यूएई में हो और दूसरा अगर भारतीय बोर्ड टैक्स में छूट नहीं ले पाती है तो उसे टैक्स भरने की जिम्मेदारी उठानी होगी. यह टैक्स 226.58 करोड़ रुपये और ज्यादा से ज्यादा 906.33 करोड़ रुपये है.

बीसीसीआई सचिव जय शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे हैं जबकि बोर्ड के कोषाध्यक्ष अरुण कुमार धूमल केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के भाई हैं. अनुराग ठाकुर बीसीसीआई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और ओ उनके ही मंत्रालय को टैक्स छूट पर फैसला लेना है.

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वर्ल्ड कप 2011 के आयोजन के समय मनमोहन सिंह सरकार ने आखिरी समय में टैक्स छूट की अपील का मान लिया था. वहीं टी20 वर्ल्ड कप 2016 के भारत में आयोजन के समय मोदी सरकार ने सिर्फ 10 फीसदी छूट दी थी. टैक्स में कम छूटने मिलने की वजह से आईसीसी ने बीसीसीआई के शेयर में 23.75 मिलियन डॉलर की कटौती की थी. 24 दिसंबर को हुए बीसीसीआई के एजीएम में भी इस बात पर चर्चा हुई है. बीसीसीआई के एक अधिकारी के मुताबिक बैठक में सभी इस बात पर सहमत नहीं थे कि अगर सरकार छूट नहीं देती है तो क्या बीसीसीआई को टैक्स देना चाहिए.






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